Saturday, 8 September 2012

 
                                  "  दलित  और  महा  - पुरष "



        "  यह बड़े आश्चर्य  की बात है कि जिन  महापुरषों  को दलितों ने मन से माना हैं , उन्हें सवर्णों ने अस्वीकार  कर  दिया हैं , चाहे ओ महापुरष   किसी जाति  में  पैदा हुए हों , संत कबीर दास जी , भगवान  महात्मा  बुद्ध डा0  अम्बेडकर  इसके  प्रत्यक्ष  प्रमाण  है .  संत  कबीर दास  और  भगवान  बुद्ध   दलित जाति  में नहीं पैदा हुए . सही तो यह है की महा पुरषों  की कोई जाति  नहीं होती , और ना  ही दलितों  की ही कोई जाती होती है . लेकिन हमारे देश के लोगों  को सही  महा पुरषों  की पहचान नहीं है . आज  जब पूरे  देश में डा 0 अम्बेडकर  को आजादी  के बाद का सबसे महान  पुरष  चुना  गया है . उन्हें  केवल दलितों ने ही नहीं चुना है . पूरा समाज ने   उन्हें  महान  माना  है तो , सवर्ण  जाति  के लोग डा 0 अम्बेडकर  को दलितों का मशीहा क्यों कहती है , जब की आज  वे देश के सबसे महान  मशीहा  हैं .    "

                                                                             डा 0 महेन्द्र  कुमार निगम 

                                                   

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