" दलित और महा - पुरष "
" यह बड़े आश्चर्य की बात है कि जिन महापुरषों को दलितों ने मन से माना हैं , उन्हें सवर्णों ने अस्वीकार कर दिया हैं , चाहे ओ महापुरष किसी जाति में पैदा हुए हों , संत कबीर दास जी , भगवान महात्मा बुद्ध डा0 अम्बेडकर इसके प्रत्यक्ष प्रमाण है . संत कबीर दास और भगवान बुद्ध दलित जाति में नहीं पैदा हुए . सही तो यह है की महा पुरषों की कोई जाति नहीं होती , और ना ही दलितों की ही कोई जाती होती है . लेकिन हमारे देश के लोगों को सही महा पुरषों की पहचान नहीं है . आज जब पूरे देश में डा 0 अम्बेडकर को आजादी के बाद का सबसे महान पुरष चुना गया है . उन्हें केवल दलितों ने ही नहीं चुना है . पूरा समाज ने उन्हें महान माना है तो , सवर्ण जाति के लोग डा 0 अम्बेडकर को दलितों का मशीहा क्यों कहती है , जब की आज वे देश के सबसे महान मशीहा हैं . "
डा 0 महेन्द्र कुमार निगम
SAVARN SACHCHHAI KO CHHUPA NAHI SAKTA HAI....
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