Tuesday, 18 September 2012

                 "   डा 0 अम्बेडकर  और राष्ट्र प्रेम "



            "व्यक्तिगत  स्तर  पर मैं यह स्पष्ट कहना  चाहता हूँ कि मैं नहीं मानता कि इस  देश में किसी विशेष संस्कृति के लिए कोई  जगह हैं .चाहे वह हिन्दू संस्कृति हो , या मुस्लिम संस्कृति , या कन्नड़ संस्कृति , या गुजरती संस्कृति . ये ऐसी चीजें हैं .जिन्हें हम नकार नहीं सकते, पर उनको वरदान नहीं मानना चाहिए .बलिक अभिशाप की तरह मानना चाहिए . जो हमारी निष्ठा  को डिगाती है और हमें अपने लक्ष्य सी दूर ले जाती है .  यह लक्ष्य है , एक  भावना को विकसित करना कि हम सब भारतीय हैं ."
                                   डा 0 अम्बेडकर 

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