" डा 0 अम्बेडकर और राष्ट्र प्रेम "
"व्यक्तिगत स्तर पर मैं यह स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि मैं नहीं मानता कि इस देश में किसी विशेष संस्कृति के लिए कोई जगह हैं .चाहे वह हिन्दू संस्कृति हो , या मुस्लिम संस्कृति , या कन्नड़ संस्कृति , या गुजरती संस्कृति . ये ऐसी चीजें हैं .जिन्हें हम नकार नहीं सकते, पर उनको वरदान नहीं मानना चाहिए .बलिक अभिशाप की तरह मानना चाहिए . जो हमारी निष्ठा को डिगाती है और हमें अपने लक्ष्य सी दूर ले जाती है . यह लक्ष्य है , एक भावना को विकसित करना कि हम सब भारतीय हैं ."
डा 0 अम्बेडकर
"व्यक्तिगत स्तर पर मैं यह स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि मैं नहीं मानता कि इस देश में किसी विशेष संस्कृति के लिए कोई जगह हैं .चाहे वह हिन्दू संस्कृति हो , या मुस्लिम संस्कृति , या कन्नड़ संस्कृति , या गुजरती संस्कृति . ये ऐसी चीजें हैं .जिन्हें हम नकार नहीं सकते, पर उनको वरदान नहीं मानना चाहिए .बलिक अभिशाप की तरह मानना चाहिए . जो हमारी निष्ठा को डिगाती है और हमें अपने लक्ष्य सी दूर ले जाती है . यह लक्ष्य है , एक भावना को विकसित करना कि हम सब भारतीय हैं ."
डा 0 अम्बेडकर
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